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Showing posts from September, 2017

प्रेम!

ए साथी सो जाओ तुम,
सोने से कुछ आराम होगा।
मन का सागर जो विचलित है,
कम थोड़ा सा उफान होगा।

प्रेम यही है...
इसमें थोड़ा आकाश केसरिया दिखेगा ही,
बारिश का रंग हरा होगा,
चाँद सोने सा पीला,
प्रेमी का रंग होगा लाल, नस नस में वो दौड़ेगा भी।

ए साथी तुम व्याकुल ना होना,
ये फेर बदल सब हिस्सा है।
प्रेम रंगा मन नहीं सोचता,
कौन सा रंग किसका है।

हृदय रखता जीवित ए साथी।
प्रेम जीवित को जीवन देता।
तेज़ किरण से भी तेज, चाल हिरण से भी तेज...
सोच इस मन से भी तेज...प्रेम पवन से भी तेज...
रोक नहीं कोई सकता।

ए साथी तुम कोशिश ना करना,
बहुत तेज़ उसकी रफ्तार।
रोके गर वो रुक जाए तो,
कौन करेगा दरिया पार।

सुंदर है लेकिन सरल नहीं।
आज आसान है पर शायद कल नहीं।

ए साथी जब दरिया में डुबो,
प्रेम में बहकर प्रेम को ढूंढो,
तब आकार बनाना उसका,
हृदय में द्वार बनाना उसका।

अभी मगर तुम सो जाओ,
सोने से कुछ आराम होगा।
मन का सागर जो विचलित है,
कम थोड़ा सा उफान होगा।

Small Towner!

All I do is smile...
Because that is what I have been taught...
By my small town mother...
Who made me a small town child...
And I thought it was bad...insulting...
Being and being called a 'small towner'.

But the tag soon became so mine...
As mine as the mother...
And I carried both of them together...
To the big cities...
With all the love and grace.
Proudly I faced...The world...the people...who tagged my name.
How could I even blame...
Them. The big towners.
They were born achievers.
I was not!

I was not packed in brands...
The coloured strands...the manicured hands...
The cars, the bungalows...the lands!
Who understands...!

The struggle of limitations...
The fight of ambitions...the urge of recognitions...
The journey through several junctions...
To reach these positions...
With the tag!

And so when you call me a small towner...
All I do is smile...
Because that is what I have been taught...by my mother...
And that is what I will teach my daughter...As her mother...

Thou…