Shoonya!

मत सोचो शून्य की कौन सी परिभाषा सटीक होगी...
शून्य अगर हो आज...कल दशा विपरीत होगी...
और शून्य होने मे बुराई भी क्या है?
कौन ले गया ये अंक...ये महलें, ये घोड़े, ये सिक्के,
राजा हो या रंक?
सब शून्या ले कर आए...शून्य ले कर गये...
जो अंक . जीवन भर जोड़े...पीछे ही छ्चोड गये...

तो दूख किस बात का?
रेस मे विजेता ना आने का,
या अपनी ही कोई रेस ना बनाने का?
या उसके भी आगे ना निकल जाने का?

आगे है क्या?
कौन है जिसे मिलना है...कहाँ तक पहुचना है?
क्या हासिल करना है?

शान...शौकत...पैसे...इज़्ज़त?
जानते हुए भी हक़ीक़त...
की शून्य लेकर आए हो...शून्य ही लेकर जाओगे!

जब तक रेस मे शामिल हो... ये गणित कहाँ समझ पाओगे!

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